कर्नाटक हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा-हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर बैन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार के आदेश को संवैधानिक बताया है।

हिजाब विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म का प्रिस्क्रिप्शन एक उचित प्रतिबंध है, जिस पर छात्र आपत्ति नहीं कर सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि 5 फरवरी के राज्य सरकार के आदेश को अमान्य करने के लिए कोई केस नहीं बनता है। कोर्ट ने कहा कि  हमारी राय है कि मुसलमान महिलाओं का हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में अनिवार्य धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है।

उडुपी में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में पिछले साल दिसम्बर में ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के लिए कुछ लड़कियों को कक्षा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गयी थी। हिजाब के कारण प्रवेश नहीं पाने वाली छह लड़कियां प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीपीआई) की ओर से एक जनवरी को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुई थीं।

इन छात्राओं ने क्लास में हिजाब पहनकर आना शुरू कर दिया था। इसके बाद विरोध में हिंदू छात्रों ने केसरिया गमछा रखना शुरू कर दिया था।  धीरे-धीरे यह मामला कर्नाटक के कई जिलों में फैल गया। जबकि राज्य सरकार ड्रेस से जुड़े नियमों पर अड़ी रही। हिजाब पहनकर क्लास करने की इजाजत देने की मांग करते हुए छात्रों की ओर से कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद आज हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।

वहीं फैसले के मद्देनजर राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है।  दक्षिण कन्नड़, कलबुर्गी और शिवमोग्गा जिलों में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई है। पूरे राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बेंगलुरु में 21 मार्च तक धारा 144 लागू कर दिया गया है।

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