देश में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सोशल मीडिया का बढ़ता दुरुपयोग*

दीपक कुमार त्यागी
आज हमारे देश में दिन-प्रतिदिन सोशल मीडिया का दायरा बहुत ही तेजी से बढ़ता जा रहा हैं आज देश के अधिकांश लोग सोशल मीडिया को अपने विचारों के आदान-प्रदान करने का बेहद सशक्त माध्यम मानने लगे। कुछ लोगों को तो सोशल मीडिया की लत लग गई हैं जो हर समय ही उस पर व्यस्त रहते है, अपनी व्यापक पहुंच व सरलता के चलते देश में आज सोशल मीडिया आम आदमी के रोजमर्रा की उपभोग की बेहद जरूरत की वस्तु बन गया। वैसे तो हमारे देश में अपने विचार व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हैं। साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी का मौलिक अधिकार ही हमारे लोकतंत्र की असली बुनियाद है। देश में आज लोगों को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से रखने के लिए सोशल मीडिया ने जो असीम अवसर प्रदान किये हैं कुछ वर्षों पूर्व किसी भी व्यक्ति ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। आज देश में सोशल मीडिया के प्लेटफार्म के माध्यम से समाज में बेहद आसानी से कोई भी व्यक्ति अपने विचार रख कर लोगों का आसानी से ध्यान आकर्षित करके बदलाव की एक नई बुनियाद रख सकता हैं। इसके सबसे बड़े उदाहरण हाल ही कुछ वर्षों के घटनाक्रम हैं जिनमें में सोशल मीडिया के माध्यम से देश में बेहद आसानी से लोगों को जोड़ कर बड़े जनमानस के मसले वाले जन आंदोलनों की शुरुआत हुई है जिनमें से मुख्य रूप से 2014 में राष्ट्रीय राजनीति में आते ही नरेंद्र मोदी जी का देश के आम जनमानस पर छा जाना, अरविंद केजरीवाल का आंदोलन, बाबा रामदेव का आंदोलन, अन्ना आंदोलन, निर्भया कांड के बाद यौन हिंसा के खिलाफ सारे देश में आंदोलन, रोहित वेमुला प्रकरण पर देश में छात्रों की लामबंदी, हरियाणा का जाट आरक्षण, राजस्थान का गुज्जर आरक्षण, दलितों का आरक्षण बचाओं आंदोलन, किसानों के आंदोलन आदि बेहद सफल आंदोलनों के साथ ही साथ पुलवामा में पाकिस्तान परस्त आतंकियो की कायराना हरकत के खिलाफ पाकिस्तान के खिलाफ विश्व समुदाय को लामबंद करना, भारतीय एयरफोर्स के जाब़ाज पायलट अभिनंदन की रिहाई के लिए लामबंदी करना आदि सफल अभियानों ने देश में सोशल मीडिया का प्रभाव दिखा दिया हैं।
सोशल मीडिया की सबसे बड़ी बात अब यह बन गयी हैं कि जब से सोशल मीडिया पर आक्रामक प्रचार से दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं तब से देश के सभी राजनैतिक दल चुनावों व उसके बाद भी अपनी बातों का प्रचार-प्रसार करने के लिये सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे हैं जो कि भविष्य की सकारात्मक राजनीति के लिये बहुत ही अच्छा संदेश है। लेकिन इसके साथ ही 130 करोड़ लोगों के देश में आज सबसे बड़ी चिंता की बात यह हैं कि आज देश में दिन-प्रतिदिन सोशल मीडिया का दुरुपयोग बेहद तेजी के साथ बड़ रहा हैं जो कि देश व समाज की एकता अखंडता के लिये बेहद घातक हैं आज लोग सोशल मीडिया के माध्यम से एक दूसरे के खिलाफे दुष्प्रचार करने, धमकाने, गलतफहमी फैलाने, गलत खबरों का प्रचार करने, देश में तरह-तरह की अफवाहें फैलाने, किसी के भी खिलाफ निंदा अभियान चलाने, व्यक्ति का चरित्र हनन करने, समाज में तनाव पैदा करने, ठगी करने और धोखाधड़ी तक करने में कर रहे है जो की स्वास्थ्य समाज व हमारे देश के लिये बेहद घातक हैं।  आज देश में इस बात का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है, या नकारात्मक, लेकिन देश में जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक की हाल की कुछ नकारात्मक घटनाओं का अगर विश्लेषण करे तो यह स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग पहले से बहुत ज्यादा हो रहा हैं आयेदिन तरह-तरह की आपराधिक घटनाओं को अब सोशल मीडिया के माध्यम से अंजाम दिया जाने लगा हैं। देश में अभी हाल की कुछ घटनाओं पर नजर डा़लेे जैसे कि हरियाणा में बाबा रामरहीम मामला, हरियाणा में ही जाटों का आरक्षण मामला, उत्तर प्रदेश के कासगंज के दंगे, मुजफ्फरनगर के दंगे, पश्चिम बंगाल में आयेदिन सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के लिये सोशल मीडिया के दुुरुपयोग, जम्मू कश्मीर में पत्थर बाजी के लिये पत्थरबाजों की सोशल मीडिया पर बनी नेटवर्किंग, महाराष्ट्र के कोरेगांव में दंगा, उत्तर प्रदेश के साहरनपुर में जातिय हिंसा आदि घटनाएं और सबसे बड़ी चिंताजनक बात यह हैं कि लोगों की नकारात्मक सोच के चलते सोशल मीडिया आज बहुत तेजी झूठ परोसने व नकारात्मक विचारों का प्रचार-प्रसार करने का अड्डा बनता जा रहा हैं आज देश में सोशल मीडिया के हालाता ऐसे है जिसकी तरफ सरकार को हर पल बहुत ही तेजी के साथ तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता हैं ।
देश में जहाँ तो एक तरफ हमारी सरकार डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रम लाकर देश की तस्वीर बदलने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी तरफ हम इस कार्यक्रम के एक सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्से सोशल मीडिया का कुछ नकारात्मक तत्व गलत ढंग से इस्तेमाल करके उसका दुरुपयोग करके सरकार और देश की कानून व्यवस्था को चुनौती देने का काम कर रहे हैं जो कि बेहद घातक हैं। देश में आज सोशल मीडिया को लोगों की जरूरत को पूरा करने का सशक्त माध्यम बनाने, देश में सकारात्मक व्यवस्था परिवर्तन और सुधार का सशक्त माध्यम बनाने के बजाय कुछ लोग इस बेहद सशक्त माध्यम से नफरत के बीज बोने और हिंसा फैलाने पर लगे हुए हैं। अपनी इस ओछी हरकत से वो देश का माहौल खराब करके उसको विकास के रास्ते से हटाना चाहते हैं ।
आज सरकार को चाहिये कि वह अपनी आधुनिक टीम बनाकर के सोशल मीडिया पर नकारात्मक विचार फेलानें वाले लोगों की पहचान करें कि ये कौन लोग हैं , इनके पीछे कौन लोग हैं, और जो लोग हैं उनकी इस बात की पहचान होनी चाहिए कि उनकी प्रवृत्तियां क्या हैं, उनका रुझान किस नकारात्मक उद्देश्य की तरफ हैं , वो सोशल मीडिया के माध्यम से किस तरह की गतिविधियां चला रहे हैं, साथ ही साथ सरकार को इस तरह नकारात्मक फैलानें वाले लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से समझाना चाहिये कि किस तरह के अभियान देश व समाज को लाभ हैं और किस तरह के अभियान से हानि हैं। वैसे आज हमारे देश में सोशल मीडिया के सहारे नकारात्मक फैला करके माहौल खराब करने की कोशिशों की एक लंबी फेहरिस्त हैं उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, ओड़िशा , हरियाणा दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया के दुश्प्रचार से आहत हुए हैं। हाल ही के वर्षों में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, कासगंज में सांप्रदायिक दंगे के दौरान सोशल मीडिया ने आग में घी डालने का का बाखूबी किया था। यही हालाता बहुचर्चित सहारनपुर जातिय हिंसा में भी सोशल मीडिया ने किये थे यह तो केवल एक बानगी भर है। सोशल मीडिया के कारण आयेदिन देश के किसी ना किसी हिस्सें में कोई न कोई चिंताजनक घटना घटती रहती है। हाल ही के वर्षों में अकेले फेसबुक से ही भारत में ना जाने कितने आपत्तिजनक पोस्टों को हटाए गया है । ये वे पोस्ट थे जो कि हमारे देश के उन कानूनों का उल्लंघन करते थे जो धार्मिक भावनाएं आहत करने और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने के खिलाफ बने हुए  हैं। लेकिन सोचने वाली बात यह हैं कि इससे बहुत ज्यादा पोस्ट सोशल मीडिया पर ऐसी थी जो आपत्तिजनक तो थे, पर मौजूदा कानूनन उन्हें हटाना आवश्यक नहीं समझा गया था। देखने व सोचने योग्य बात यह हैं कि इतनी बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सामग्री का होना सोशल मीडिया का एक बड़े दुरुपयोग की तरफ इशारा करता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके हम समाज को क्या देना चाहते हैं और खुद क्या मुकाम हासिल करना चाहते हैं।
दोस्तों इसका नकारात्मक रूप से इस्तेमाल करके हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी जमीन तैयार कर रहे हैं यह भी सोचनीय हैं क्योंकि सोशल मीडिया की आने वाले समय मारकता और अधिक बढ़ेगी। अभी कुछ माह पहले पश्चिम बंगाल में एक नाबालिग लड़के के एक फेसबुक पोस्ट की घटना से हमारी दो कमजोरियों का पता चलता है। पहली यह कि हमारे आपसी संबंध इतने कमजोर और खोखले हो चुके हैं कि आज हमारी भावनाएं जरा सी बात से भी गम्भीर रूप से आहत हो जाती हैं। या यह कहे कि क्या हम इतने असहिष्णु हो गए हैं कि हमें अपने विवेक का इस्तेमाल करना भी गवारा नहीं? दूसरी कमजोरी यह कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कर हमें समाज में व्याप्त विभिन्न बुराईयों और विभिन्न समस्याओं के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से हम लोग आज सोशल मीडिया का इस्तेमाल देश के धार्मिक व सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के तंत्र के रूप में कर रहें हैं ।
आज सोशल मीडिया के हम बयानवीरों को देश की वास्तविक समस्याएं या तो नजर नहीं आ रही हैं या हमको देश को विकास की राह पर ले जाने का सुझाव देना कतई पसंद नहीं हैं, लेकिन आज हम सोशल मीडिया के बयानवीरों की समाज में जहर फैला कर आग लगाने कि आदत से हर मसले को धार्मिक रंग देना हमारी नियति व फितरत बन गई है। जिसके नतीजतन हम अपने प्यारे देश व लोगों के सामाजिक ताने-बाने को अपने ही हाथों से तोड़ कर देश की एकता अखंडता व विकास के मार्ग में रुकावट भी बनते हैं। आज हम सभी देशवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम देश के जायज मुद्दों और राजनीति के गिरते स्तर को लेकर अपनी आंखें क्यों मूंद लेते हैं हम लोग आज उस कबुतर की तरह से हो गये हैं जो कि बिल्ली को अपनी तरफ आता देखकर अपनी आंखें बंद करके यह सोचता हैं कि बिल्ली से उसकी जान बच गयी हम भी आज ठीक उसी तरह सोशल मीडिया के दुरूपयोग के खतरें को देख नहीं पा रहें हैं। दोस्तों आज सारे विश्व में जिस प्रकार सोशल मीडिया की मारक क्षमता हो गयी हैं वह देखने योग्य हैं अगर सकारात्मक सोच के साथ चलें तो ये बहुत अच्छी और अगर नकारात्मक सचो के साथ चलें तो ये देश व समाज के लिये बेहद घातक हैं।
अभी हाल ही के वर्षों में जिस प्रकार से मिस्र में राजनीतिक परिवर्तन के लिए, लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए- जिसे अरब स्प्रिंग कहा गया- सोशल मीडिया का प्रयोग किया गया था क्या हम उसको भूल गए? क्या इस बात की कल्पना भी विश्व में किसी ने की होगी कि एक युवा सब्जी विक्रेता की आवाज ट्यूनीशिया से अरब के लगभग पंद्रह विभिन्न देशों में पहुंच जाएगी? क्या किसी ने सोचा होगा कि इतने अनोखे ढंग से दूरदराज के लोगों को क्रांति से जोड़ा जा सकेगा? लेकिन यह सब संभव हुआ केवल और केवल सोशल मीडिया के कारण। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के कारण ही कई देशों की सरकार के कुशासन और तानाशाही के खिलाफ भारी जन सैलाब सडकों पर उमड़ पड़ा और उसके चलते कई देशों के दिग्गज शासकों को अपनी गद्दी व जान तक गंवानी पड़ी, साथ ही कितनों को जेल की हवा भी खानी पड़ी। इससे हाल फिलहाल में इन देशों में अभी तक भले ही सबकुछ न बदला हो, लेकिन भविष्य में बहुत कुछ बदलने की उम्मीद अभी वहाँ के लोगों को बाकी है । लोगों को उम्मीद हैं की सब कुछ जल्द ही बदल कर देश नयी रहा पर चलेगा ।
दोस्तों अब समय आ गया हैं जब हम सभी देशवासी विचार करे कि देश के जिस ग्रामीण इलाकों में जहां पगडंडियों के सहारे नदी पार कर दुर्गम रास्तों से बच्चे पढ़ने जाते हो और फिर पढ़कर देश के विकास के लिये काम करते हो, जिस देश में उधोगपति , भिन्न-भिन्न प्रदेशों से आये मजदूर और किसान रातदिन मेहनत करके देश की जीडीपी को बढ़ाते हो जिस देश में चंद कदमों पर वस्त्र, बोली और पानी बदल जाता हो। फिर भी उसको एकता के सुत्र में पिरोकर एकजुट करके हमारे पुर्वजों ने अखंड भारत का निर्माण बेहद कठिन परिस्थितियों में किया था। लेकिन आज सोचने वाली बात यह हैं कि उसी देश में ये कौन लोग हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संकीर्ण और नकारात्मक मानसिकता के कारण इन लोगों की सारी मेहनत पर पानी फेर कर देश में अमनचैन-भाईचारे को खत्म करने का दुस्साहस बार-बार कर देते हैं। आज ये चंद गद्दार लोग सुविधाओं से लैस, घरों में बैठे-बैठे सोशल मीडिया के बेहद सशक्त माध्यम से देश में नफरत के बीज बोने का काम लगातार कर रहे हैं। आज ये चंद लोग देशवासियों को उकसा कर देश में आपसी भाईचारे को खत्म करने का बार-बार दुस्साहस कर रहे है ये लोग देश के लिए चुनौती बन रहे हैं। लेकिन फिर भी अभी तक हमारे कानों पर जूं क्यों नहीं रेंगती? क्या देश व समाज को बेहतर बनाने के लिए सारा दायित्व केवल सरकार का ही होता है हम सभी देशवासियों व हमारा कोई नैतिक दायित्व नहीं होता है? क्या हम नहीं चाहते कि हमारी आने वाली पीढ़ी एक विकसित देश में बेहद अनुशासित और साफ-सुथरे माहौल में अमनचैन से रहे? लिहाजा, आज हमें देश व समाज हित में गहन चिंतन व आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।
आज देश में साइबरक्राइम, साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग का ज्वंलत मुद्दा ऐसा है, जिसकी अब अनदेखी नहीं की जा सकती हैं । आज सरकार को देश में तत्काल सोशल मीडिया पर नफरत भड़काने वाली सामग्री को पोस्ट व साझा करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिये। जिनसे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा भी रहता है। जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा पर भी आंच आ सकती है। ऐसे में इसके खिलाफ बेहद सख्त कानून की तत्काल आवश्यकता है। आज एक तरफ हमारा देश सूचना क्रांति की राह पर दिन-प्रतिदिन नये आयाम स्थापित करता जा रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ इससे जुड़ी चुनौतियां भी हमारे सामने दिन-प्रतिदिन  बढ़ती जा रही हैं इसलिए हमारे देश में भी वैसे ही कठोर कानून की जरूरत है जैसा जर्मनी में हाल ही में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री का पोस्ट व इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत वहाँ पर सोशल मीडिया कंपनियों को चौबीस घंटों के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाना होता हैं, अन्यथा उन पर पचास लाख यूरो से पांच करोड़ यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कंपनियों को हर छह महीने बाद सार्वजनिक रूप से बताना होता हैं कि उन्हें कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर किस प्रकार संज्ञान लिया गया। इसके अलावा उन्हें उस यूजर की पहचान भी बतानी होती हैं, जिस पर लोगों की मानहानि या गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया गया है। इस कानून के जानकारों का मानना है कि यह कानून सोशल मीडिया के लिए लोकतांत्रिक देशों में अब तक का सबसे कठोर कानून है। हमारे देश की सरकार को भी अब यह समझना होगा कि हालात बिगड़ने पर इंटरनेट की सुविधा को कुछ समय के लिए बंद कर देने भर से समस्या का समाधान स्थायी नहीं होता हैं बल्कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग करने पर जर्मनी जैसी सख्त सजा की पहल करने की जरूरत है तब ही देश की एकता अखंडता बरकरार रहेगी और देश में अमनचैन कायम रहेगा ।

ई-पत्रिका

धर्म

Scroll Up