Haryana Loksabha Chunav 2024: जाटलैंड में क्‍या हिंदुत्‍व का मुद्दा असर दिखाएगा या विपक्ष की गुटबंदी होगी कामयाब

Haryana Loksabha Chunav 2024: जाटलैंड में क्‍या हिंदुत्‍व का मुद्दा असर दिखाएगा या विपक्ष की गुटबंदी होगी कामयाब

Haryana Loksabha Chunav 2024:  लोकसभा चुनाव के छठें चरण में हरियाणा के 10 लोकसभा सीट पर एक साथ चुनाव है. हरियाणा की राजनीतिक धुरी लंबे समय तक जाट समुदाय के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है. सूबे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही हैं. एक तरफ बीजेपी 2019 की तर्ज पर सभी 10 सीटों को जीतने के इरादे से चुनावी मैदान में डटी है. तो दूसरी तरफ कांग्रेस इंडिया गठबंधन के तहत बीजेपी को इस बार कड़ी टक्कर देता नजर आ रहा है.

बीजेपी के लिए इस बार सभी 10 सीटों को जीतने की राह आसान दिखाई नहीं दे रही है. एक तरफ कांग्रेस दावा कर रही है कि वो हरियाणा की सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगी, तो वहीं बीजेपी भी सभी 10 सीटों पर जीत का दावा कर रही है. हरियाणा में मौजूदा वक्त में सभी दस सीटों की क्या स्थिति है? क्या बीजेपी सभी सीटें जीतकर रच पाएगी इतिहास? या कांग्रेस की होगी जीत?  आइए जानते हैं

हरियाणा, जिसका अर्थ है “हरि की वन भूमि” (देवी विष्णु), का एक लंबा और शानदार इतिहास वैदिक काल से है. यह राज्य, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘पृथ्वी पर स्वर्ग’ है, प्रसिद्ध भरत राजवंश का जन्मस्थान था, जहां से देश का नाम ‘भारत’ पड़ा. वेद यहीं लिखे गए थे, भगवान कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान प्रसिद्ध भगवद-गीता प्रवचन दिया था, और वेद व्यास ने इसी क्षेत्र में संस्कृत में महाकाव्य ‘महाभारत’ की रचना की थी. अधिकांश हिंदू धर्म और सभ्यता आधुनिक हरियाणा के समतल, शुष्क मैदानों पर विकसित हुई है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: चंडीगढ़

हरियाणा और पंजाब की संयुक्‍त राजधानी और सिटी ब्‍यूटीफुल नाम से दुनियाभर में मशहूर चंडीगढ़ में 25 मई को वोट डाले जाएंगे.इस सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी और किरण खेर इस क्षेत्र से सांसद बनीं. इस शहर की हरियाली और स्वच्छता इसे देश के अन्य शहरों से अलग करती है.

पिछले कुछ लोकसभा चुनावों के परिणामों पर नजर दौड़ाएं तो चंडीगढ़ जिस तरह का केंद्र शासित प्रदेश है उसके परिणाम भी ठीक उसी तरह से दिखाई दे रहे हैं. यहां की सीट अक्सर उस पार्टी के पास रही है, जिसकी केंद्र में सरकार होती है. पिछले दो लोकसभा चुनाव साल 2014 और 2019 को देखें तो यहां पर बीजेपी की बाजी मारी है. हालांकि साल 2014 से पहले इस लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी का ही राज रहा है.

इस बार यहां से गठबंधन के उम्मीदवार मनीष तिवारी हैं. तो बीजेपी ने किरण खेर की जगह संजय टंडन को उम्मीदवार बनाया है. टंडन चंडीगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष हैं.संजय टंडन का राजनीतिक करियर 1991 में शुरू हुआ था जब उन्हें अमृतसर लोकसभा सीट का प्रभारी बनाया गया था. टंडन तब से लेकर अब तक बीजेपे की अलग-अलग इकाई के प्रभारी रहे हैं. वह हिमाचल प्रदेश बीजेपी के भी सह-प्रभारी हैं. वह लंबे समय तक चंडीगढ़ के अध्यक्ष रहे हैं. ऐसे में उनके पास लंबा चौड़ा राजनीतिक अनुभव है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: अंबाला

अंबाला लोकसभा सीट से बीजेपी ने पूर्व सांसद स्वर्गीय रतनलाल कटारिया की धर्मपत्नी बंतो कटारिया को टिकट दिया है. कांग्रेस ने उनके सामने विधायक वरुण मुलाना को चुनावी मैदान में उतारा है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस सीट पर बीजेपी कांग्रेस से अभी आगे दिखाई दे रही है. बीजेपी के लिए प्लस प्वाइंट ये है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का विधानसभा क्षेत्र अंबाला लोकसभा क्षेत्र में आता है. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री कंवर पाल गुर्जर, राज्य मंत्री असीम गोयल, विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता और पूर्व गृह मंत्री अनिल विज का विधानसभा क्षेत्र भी इसी सीट के तहत आता है. ऐसे में ये सभी नेता बीजेपी उम्मीदवार बंतो कटारिया की नैया पार लगा सकते हैं.

इसके अलावा बंतो के पति स्वर्गीय रतनलाल कटारिया की छवि भी मिलनसार नेता के तौर पर थी. ऐसे में लोगों की सहानुभूति का एक फैक्टर भी उनके पक्ष में जा सकता है. कांग्रेस उम्मीदवार वरुण मुलाना भी साफ छवि के नेता के तौर पर जानें जाते हैं, लेकिन उन्हें इस सीट पर खुद की पार्टी के नेताओं का उतना साथ नहीं मिल रहा है. जितना मिलना चाहिए. हालांकि बीजेपी के खिलाफ जाने वाले किसानों के फैक्टर से उन्हें इस सीट पर फायदा मिल सकता है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: कुरुक्षेत्र

हरियाणा की यह चर्चित सीटों में से एक है. कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए नवीन जिंदल को बीजेपी ने कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. उनके सामने इंडिया गठबंधन समर्थित आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉक्टर सुशील गुप्ता चुनावी मैदान में हैं. वहीं इनेलो नेता अभय चौटाला भी इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

ऐसे में इस सीट पर बीजेपी और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सुशील गुप्ता के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. हालांकि अभय चौटाला किसी का भी खेल इस सीट पर बिगड़ सकते हैं. वहीं नवीन जिंदल इस सीट पर पहले भी कांग्रेस पार्टी की तरफ से सांसद रहे हैं. लिहाजा इस क्षेत्र में उनका अपना एक जनाधार है. जिससे उन्हें फायदा मिल सकता है.

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी यहां से मौजूदा सांसद हैं. जाट, सैनी, ब्राह्मण और रोड़ बाहुल्य इस सीट पर सैनी ने 2019 में 56 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस के चौधरी निर्मल सिंह को 31 प्रतिशत मतों के भारी अंतर से पराजित किया था.

2004 और 2009 में उद्योगपति नवीन जिंदल ने कांग्रेस के टिकट पर कुरुक्षेत्र से दो बार लोकसभा चुनाव जीता था, जबकि 2014 में भाजपा के तत्कालीन सांसद राजकुमार सैनी के हाथों पराजित होकर तीसरे नंबर पर खिसक गए थे.

Haryana Loksabha Chunav 2024: करनाल

करनाल लोकसभा सीट पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं. इस वक्त तक वो अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार दिव्यांशु बुद्धिराजा से आगे दिखाई देते हैं. हालांकि दिव्यांशु बुद्धिराजा उन्हें कड़ी टक्कर देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वो पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं, इसलिए उनकी राह इस सीट पर आसान दिखाई नहीं देती. हालांकि युवा चेहरे के तौर पर वे पूर्व सीएम को चुनौती दे रहे हैं. बावजूद इसके पूर्व सीएम मनोहर लाल के राजनीतिक अनुभव के सामने दिव्यांशु बुद्धिराजा कमजोर दिखाई देते हैं. जिसकी वजह से इस सीट पर बीजेपी अभी आगे दिखाई दे रही है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: सोनीपत

सोनीपत लोकसभा सीट पर बीजेपी की तरफ से विधायक मोहनलाल बड़ौली चुनावी मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस पार्टी ने सतपाल ब्रह्मचारी को चुनावी मैदान में उतारा है. सतपाल ब्रह्मचारी की पहचान एक संत के तौर पर भी है. इस क्षेत्र में उनका काफी अच्छा प्रभाव भी है. जिसकी वजह से वो यहां पर बीजेपी उम्मीदवार से आगे दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी उम्मीदवार मोहनलाल बड़ौली की छवि भी एक अच्छे नेता के तौर पर है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: रोहतक

 

हरियाणा की हॉट सीट में से एक रोहतक सीट है. इस सीट पर बीजेपी के मौजूदा सांसद अरविंद शर्मा फिर से चुनावी मैदान में हैं और उनकी फिर से चुनावी टक्कर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा से है. हालांकि पिछले चुनाव यानी 2019 में अरविंद शर्मा ने दीपेंद्र हुड्डा को इसी सीट से हराया था. लेकिन इस बार दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदा स्थिति मजबूत दिखाई देती है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: फरीदाबाद

इस सीट पर भी बीजेपी ने मौजूदा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को चुनावी मैदान में उतारा है. हालांकि कांग्रेस ने भी उनके मुकाबले में गुर्जर समाज के हो बड़े नेता चौधरी महेंद्र प्रताप को उम्मीदवार बनाया है. जिसकी वजह से इस सीट पर इन दोनों नेताओं के बीच में कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है.

महेंद्र प्रताप काफी लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे, बावजूद इसके कांग्रेस ने उन पर दांव खेल कर कृष्णपाल गुर्जर की मुश्किल बढ़ाई हुई है. कृष्ण पाल गुर्जर के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी फैक्टर भी काम कर रहा है, क्योंकि वे पिछले 10 सालों से सांसद हैं. वहीं महेंद्र प्रताप लंबे समय बाद सक्रिय राजनीति में वापस आए हैं, तो उनको उसका भी फायदा मिल रहा है. हालांकि उनकी बयानबाजी की वजह से उनको दिक्कत हो सकती है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: गुरुग्राम

इस सीट पर भी बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को मैदान में उतारा है. राव साहब के नाम से मशहूर राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता हैं, इसको देखते हुए कांग्रेस ने भी उनके सामने राज बब्बर को उम्मीदवार बना कर उन्हें चुनौती देने की पूरी कोशिश की है. हालांकि वे राव इंद्रजीत सिंह को कितनी चुनौती दे पाएंगे, ये तो चुनावी नतीजे ही बताएंगे.

वर्तमान में इस सीट पर राव इंद्रजीत सिंह मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं. राव इंद्रजीत लगातार पांच बार सांसद रह चुके हैं. अगर वो इस बार भी जीतने में कामयाब होते हैं, तो छठी बार सांसद बनने का रिकॉर्ड भी बनाएंगे. हालांकि राज बब्बर अपनी कमजोर कड़ियों को जोड़ने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं. इसलिए वो कैप्टन अजय यादव को भी साथ ले रहे हैं. वो अन्य जातीय और सामाजिक समीकरणों पर भी काम कर रहे हैं. फिर भी वो राव इंद्रजीत के मुकाबले कमजोर दिखाई दे रहे हैं.

Haryana Loksabha Chunav 2024: भिवानी महेंद्रगढ़

इस सीट पर भी बीजेपी की तरफ से मौजूदा सांसद चौधरी धर्मवीर को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि उनके सामने कांग्रेस उम्मीदवार राव दान सिंह हैं. जो पहली बार लोकसभा चुनाव के रण में उतरे हैं. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी में सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है. एक तरफ बीजेपी उम्मीदवार धर्मबीर के लिए एंटी इनकंबेंसी फैक्टर काम कर रहा है. दूसरी तरफ वो पिछले दस साल में क्षेत्र में कोई प्रभावी काम नहीं करवा पाए. केंद्र और राज्य में वो अलग-थलग दिखाई दिए.

हालांकि बीजेपी उम्मीदवार धर्मबीर सिंह अपने स्वभाव की वजह से लोगों के करीब हैं, मिलनसार हैं, वो लोगों से अच्छे से डील करते हैं. वहीं राव दान सिंह भी मिलनसार हैं, सबसे बड़ी बात नए चेहरे हैं. ये बात उनके पक्ष में है. कास्ट फैक्टर भी इनके काम आ रहा है, हालांकि राव दान सिंह अपने क्षेत्र में कमजोर दिखाई दे रहे हैं. क्योंकि उनकी अपनी पार्टी के नेता भी उनकी जीत की राह में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं. शहरी क्षेत्र में बीजेपी, कस्बों में फिफ्टी-फिफ्टी, तो ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस मजबूत दिखाई दे रही है.

Haryana Loksabha Chunav 2024: सिरसा

सिरसा लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी ने हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और आप पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए डॉक्टर अशोक तंवर को उम्मीदवार बनाया है. जबकि कांग्रेस की तरफ से हरियाणा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष कुमारी सैलजा को मैदान में उतारा है. इस सीट पर अभी कांग्रेस ज्यादा मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है.

अशोक तंवर स्वभाव से शालीन नेता के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन उनका बार-बार पार्टी बदलना और मौजूदा सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी उनके खिलाफ जा रहा है. भले ही बीजेपी ने काफी समय पहले उन्हें उम्मीदवार बना दिया था, लेकिन उनका चुनाव अभियान उस तरह की गति नहीं पकड़ पा रहा है. जिस तरह से होना चाहिए था. वहीं कुमारी सैलजा पहले भी इस सीट से सांसद रह चुकी हैं. लिहाजा उनके पक्ष में लोगों का झुकाव देखने को मिल रहा है. जिसकी वजह से वो अशोक तंवर के मुकाबले मजबूत दिख रही हैं.

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Haryana Loksabha Chunav 2024: हिसार

इस बार हरियाणा की सबसे हॉट सीट हिसार बनी हुई है. यहां पर बीजेपी ने प्रदेश सरकार में मंत्री और निर्दलीय विधायक रहे रणजीत चौटाला को मैदान में उतारा है. उनके सामने कांग्रेस पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश को उम्मीदवार बनाया है. वहीं रणजीत चौटाला के सामने उनके परिवार की दो बहू चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. रणजीत चौटाला के पक्ष में जो बातें हैं. उनमें उनका सरकार में मंत्री होना, हिसार के लोगों से जुड़े रहना और हिसार में एक्टिव रहना है.

वहीं किसानों का विरोध और बिश्नोई परिवार की दूरी रणजीत चौटाला के खिलाफ है. उनके सामने जेजेपी से नैना चौटाला और इनेलो से सुनैना चौटाला चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस उम्मीदवार जय प्रकाश भी अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. वो इस क्षेत्र से सांसद भी रहे हैं. जाट वोट बैंक ज्यादा होने का फायदा उठाना चाह रहे हैं. हालांकि चौधरी बीरेंद्र सिंह परिवार की उनसे दूरी, आदमपुर उप चुनाव की हार और इस क्षेत्र से काफी वक्त तक दूर रहना उनके खिलाफ जा सकता है.

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