caste equation of Kashi: भव्‍य रोड शो….. काल भैरव का दर्शन….. फिर नामांकन, क्‍या है पीएम मादी की काशी का जातीय समीकरण

caste equation of Kashi: भव्‍य रोड शो..... काल भैरव का दर्शन..... फिर नामांकन, क्‍या है पीएम मादी की काशी का जातीय समीकरण

caste equation of Kashi:  कल के भव्‍य रोड शो के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन कर दिया है. इस दौरान उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए गठबंधन के कई नेता मौजूद रहे. प्रधानमंत्री सबसे पहले बनारस के दशाश्वमेध घाट गए और इसके बाद काल भैरव मंदिर के दर्शन किए.

जिस समय पीएम मोदी वाराणसी के कलेक्टर ऑफिस में नामांकन कर रहे थे, तब गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चिराग पासवान, चंद्रबाबू नायडू सहित कई दिग्गज कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद थे.

अपने दिव्‍यता के लिए मशहूर भगवान शिव की नगरी, अध्यात्म का शहर, धार्मिक राजधानी, इतिहास की झलक वाला शहर और गंगा किनारे बसी पुरातन संस्कृति की कहानी वाला शहर..ऐसे कितने नामों से विभूषित होती है वाराणसी.  मां गंगा के आशीर्वाद से हमेशा फलता-फूलता रहा ये शहर इतिहास के पन्नों में काशी के नाम से दर्ज है.

caste equation of Kashi: क्‍या है काशी का जातीय समीकरण

पीएम मोदी तीसरी बार इस सीट से नामांकन भर रहे हैं और बीजेपी का दावा है कि वो इस बार पिछली चुनावी जीतों से भी बड़ी जीत दर्ज करेंगे. सियासी दावों और रणनीतियों के पीछे क्षेत्र के कई समीकरण और उनके नंबर मुख्य वजह और बुनियाद होते हैं. पीएम मोदी के नामांकन से इतर समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर वाराणसी का सियासी समीकरण क्या कहता है. किसकी जनसंख्या ज्यादा है और कौन सा फैक्टर चुनावी नतीजा तय करने में अहम भूमिका निभाता है.

caste equation of Kashi: ओबीसी फैक्टर का वाराणसी पर इम्पैक्ट

जातीय समीकरण किसी भी चुनाव में एक बड़ा फैक्टर होता है. वाराणसी सीट की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा लगभग 2 लाख वोटर्स कुर्मी समाज के हैं. इस समाज का सबसे ज्यादा असर रोहनिया और सेवापुरी इलाके में हैं. इस सीट पर 2 लाख वैश्य वोटर्स भी हैं, जो नतीजों पर सीधा असर डालते हैं.

वाराणसी लोकसभा सीट पर कुल आबादी का 75 फीसदी शेयर हिंदू आबादी का है. वहीं 20 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. बाकी बची 5 फीसदी आबादी में अन्य धर्म के लोग आते हैं. इस सीट की 65 फीसदी आबाद शहरी क्षेत्र और 35 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. कुल आबादी का 10.01 फीसदी जनजाति और 0.7 फीसदी दलित वर्ग से हैं.

कुर्मी और वैश्य समाज के बाद ब्राह्मण और भुमिहार वोटर्स भी वाराणसी में अच्छा खासा वोट प्रतिशत रखते हैं. यादव और मुस्लिम समुदाय के वोट भी इस सीट पर चुनावी जीत के परचम को हिलान के दमखम रखते हैं. इस सीट पर यादव समाज के एक लाख वोट हैं. यादव वोटर्स से इतर इस सीट पर कुल 3 लाख वोटर ओबीसी समुदाय से संबंधित हैं.

caste equation of Kashi: कांग्रेस ने 6 तो बीजेपी ने 7 बार जीती सीट

कभी कांग्रेस के लिए सबसे महफूज सीट माने जाने वाली वाराणसी लोकसभा सीट पांच विधानसभा सीटों को मिलकर बनी है. वाराणसी दक्षिण शहर, वाराणसी उत्तर, वाराणसी कैंट, रोहनिया और सेवापुरी.

वाराणसी सीट की बात करें तो यह 1957 में अस्तित्व में आई. पहले ही आम चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. कांग्रेस के उम्मीदवार रघुनाथ सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी शिवमंगल को 71 हजार से ज्यादा मतों से मात दी. इसके बाद 1962 में भी कांग्रेस के रघुनाथ ने ही इस सीट पर जीत दर्ज की. उन्होंने जनसंघ कैंडिडेट रघुवीर को 45 हजार से ज्यादा वोटों से हराया.
1967 में पहली बार गैर कांग्रेसी प्रत्याशी ने जीत दर्ज की. भाकपा प्रत्याशी एसएन सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार को 18 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी. हालांकि 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की.

वहीं 1977 को इमरजेंसी में जनता लहर में कांग्रेस की यहां से बुरी तरह हार हुई. 1980 में कांग्रेस दोबारा लौटी यूपी सीएम कमलापति त्रिपाठी ने यहां से जीत दर्ज की. 1984 में भी कांग्रेस यहां से सीट बचाने में सफल रही.

भारतीय जनता पार्टी ने 90 के दशक में वाराणसी सीट पर अपनी आमद दर्ज कराई. पहली बार भाजपा के शीश चंद्र दीक्षित ने माकपा के राजकिशोर के 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. 1996 में भी बीजेपी प्रत्याशी ने ही यहां से जीत दर्ज की. 1998 में भी बीजेपी उम्मीदवार शंकर प्रसाद जायसवाल ने यहां से दूसरी बार जीत हासिल की.
1999 में जायसवाल ने जीत की हैट्रिक लगाई.

बीजेपी की लंबी जीत के बाद एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की. पंजे के निशान पर 2004 में राजेश कुमार मिश्रा ने शंकर प्रसाद को 57 हजार से ज्यादा मतों से हराया. इसके बाद 2009 में बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी ने इस सीट को एक बार फिर बीजेपी के पाले में ला दिया.

caste equation of Kashi: ओबीसी फैक्टर का वाराणसी पर इम्पैक्ट

जातीय समीकरण किसी भी चुनाव में एक बड़ा फैक्टर होता है. वाराणसी सीट की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा लगभग 2 लाख वोटर्स कुर्मी समाज के हैं. इस समाज का सबसे ज्यादा असर रोहनिया और सेवापुरी इलाके में हैं. इस सीट पर 2 लाख वैश्य वोटर्स भी हैं, जो नतीजों पर सीधा असर डालते हैं.

PM Narendra Modi Nomination: PM मोदी ने काशी से तीसरी बार किया नामांकन, ये दिग्गज रहे मौजूद

वाराणसी लोकसभा सीट पर कुल आबादी का 75 फीसदी शेयर हिंदू आबादी का है. वहीं 20 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. बाकी बची 5 फीसदी आबादी में अन्य धर्म के लोग आते हैं. इस सीट की 65 फीसदी आबाद शहरी क्षेत्र और 35 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. कुल आबादी का 10.01 फीसदी जनजाति और 0.7 फीसदी दलित वर्ग से हैं.

कुर्मी और वैश्य समाज के बाद ब्राह्मण और भुमिहार वोटर्स भी वाराणसी में अच्छा खासा वोट प्रतिशत रखते हैं. यादव और मुस्लिम समुदाय के वोट भी इस सीट पर चुनावी जीत के परचम को हिलान के दमखम रखते हैं. इस सीट पर यादव समाज के एक लाख वोट हैं. यादव वोटर्स से इतर इस सीट पर कुल 3 लाख वोटर ओबीसी समुदाय से संबंधित हैं.

caste equation of Kashi: 2014 से नरेंद्र मोदी काबिज

वहीं वाराणसी की लोकसभा सीट पर वो दिन भी आ गया जब यहां नरेंद्र मोदी ने लोकसभा का अपना पहला चुनाव लड़ा. यहां से उनके खिलाफ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी ताल ठोंकी, हालांकि चुनाव में नरेंद्र मोदी ने 3 लाख से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की. 2019 में भी उन्होंने एक बार फिर यहां से जीत दर्ज की और 4 लाख से ज्यादा मतों से विरोधियों को हराया.

अब तक मिले रुझानों को देखा जाए तो पीएम मोदी ने 2024 में भी वाराणसी से चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है. वह यहां से तीसरी बार भी जीत की हैट्रिक लगाने जा रहे हैं. लोगों का जबरदस्त समर्थन उन्हें मिलता दिखाई दे रहा है.

 

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