Sixth phase of Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 पहुंचा छठे चरण में, यूपी की इन सीटों पर भाजपा और सपा की प्रतिष्‍ठा दांव पर

Sixth phase of Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 पहुंचा छठे चरण में, यूपी की इन सीटों पर भाजपा और सपा की प्रतिष्‍ठा दांव पर

Sixth phase of Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर पांच फेज के चुनाव हो चुके हैं. 25 मई को छठे चरण  को लेकर मतदान हैं. इस फेज में दिल्ली की सभी 7, हरियाणा की 10, यूपी की 14, पश्चिम बंगाल और बिहार की 8-8, ओडिशा की 6 जम्मू और कश्मीर की 1 और झारखंड की 4 सीटें शामिल हैं. इस फेज के लिए कुल 889 उम्मीदवार मैदान में हैं. वहीं, सातवें फेज के लिए 1 जून को वोटिंग होगी.

छठे चरण में अगर हम राज्‍यवार देखें ताे पाएंगे कि यूपी, हरियाणा और दिल्ली में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का पदर्शन बेहद ही शानदार रहा था. इस बार दिल्‍ली में आप और कांग्रेस पहली बार लोकसभा का चुनाव एक साथ गठबंधन के तौर पर लड़ रहे हैं.  वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा एक साथ गठबंधन के तौर पर लड़ रहे थे, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन है. गठबंधन के घटक दलों के बीच का ये बदलाव चुनाव परिणाम को कितना प्रभावित करता है, ये चुनाव के नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा.

वैसे भी दिल्‍ली की सियासत पर उत्‍तर प्रदेश की राजनीति का बहुत प्रभाव रहता है. तीन पीएम और कई सीएम देने वाले आज हम उत्‍तर प्रदेश की उन 14 सीटों के बारे में समझेंगे, जहां 25 मई को वोट डाले जाएंगे.

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Sixth phase of Loksabha Election 2024: 14 सीटों पर मतदान

लोकसभा चुनाव के छठे चरण में उत्तर प्रदेश की 14 सीटों पर 25 मई को मतदान है. छठे चरण में सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, प्रयागराज, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछली शहर, भदोही में चुनाव है. छठे चरण की 14 सीटों पर 162 प्रत्याशी मैदान में हैं.

2019 के चुनाव पर नजर डालें तो इस चरण की नौ सीटों पर भाजपा, चार पर बसपा और एक पर सपा जीती थी. हालांकि, उपचुनाव में सपा को आजमगढ़ सीट गंवानी पड़ गई थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: डुमरियागंज लोकसभा सीट

उत्तर प्रदेश की चर्चित संसदीय सीटों में डुमरियागंज लोकसभा सीट भी गिनी जाती है. डुमरियागंज लोकसभा सीट सिद्धार्थनगर जिले में आती है. इस सीट से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बने जगदंबिका पाल सांसद हैं. जगदंबिका पहले कांग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. वह दोनों दलों के साथ लगातार 3 बार से सांसद चुने जा रहे हैं.

सिद्धार्थनगर जिले का इतिहास बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध से जुड़ा हुआ है. बुद्ध के पिता शुद्धोधन की राजधानी कपिलवस्तु इसी जिले में पड़ती है. इस जिले का नाम भी गौतम बुद्ध के बचपन के नाम ‘सिद्धार्थ’ के नाम पर रखा गया है. 29 दिसंबर 1988 को बस्ती जिले के उत्तरी क्षेत्र को अलग करते हुए सिद्धार्थनगर के नाम से एक नए जिले का निर्माण किया गया.

डुमरियागंज लोकसभा सीट पर बीजेपी की तरफ से जगदंबिका पाल को फिर से चुनावी मैदान में उतारा गया है. जगदंबिका पाल पिछले 15 साल से इस सीट से सांसद हैं. जबकि समाजवादी पार्टी ने भीष्ण शंकर उर्फ कुशल तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. कुशल तिवारी बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बेटे और संतकबीर नगर से 2 बार सांसद रहे हैं. उधर, बीएसपी ने मुस्लिम उम्मीदवार पर दांव लगाया है और नदीम मिर्जा को मैदान में उतारा है.

2019 के लोकसभा चुनाव में डुमरियागंज लोकसभा सीट पर बीजेपी ने जगदंबिका पाल को मैदान में उतारा तो उनके सामने बहुजन समाज पार्टी के आफताब आलम थे. बसपा के साथ चुनावी गठबंधन होने की वजह से सपा ने यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: लालगंज लोकसभा सीट

पूर्वांचल क्षेत्र में पड़ने वाला आजमगढ़ जिला अनेक ऋषियों की पावन पुण्य धरती रही है. प्रदेश के पिछड़े जिलों में शुमार आजमगढ़ में 2 संसदीय सीटें आती हैं जिसमें आजमगढ़ और लालगंज सीट आती है. 2019 के संसदीय चुनाव लालगंज सीट पर बहुजन समाज पार्टी की संगीता आजाद को जीत मिली थी.

लालगंज संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं और ये सभी सीटें आजमगढ़ जिले में ही पड़ती है. यहां की विधानसभा सीटों में अतरौलिया, निजामाबाद, फूलपुर पवई, दीदारगंज और लालगंज सीटें शामिल हैं. लालगंज सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है. लालगंज सिर्फ विधानसभा सीट ही नहीं है बल्कि यह लोकसभा सीट भी है. खास बात यह है कि यहां की सभी पांचों विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी.

लालगंज लोकसभा सीट पर बीजेपी ने फिर से नीलम सोनकर को उम्मीदवार बनाया है. नीलम सोनकर बीजेपी के टिकट पर साल 2014 में सांसद चुनी गई थीं. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की संगीता आजाद ने नीलम सोनकर को आसान मुकाबले में हराया था. समाजवादी पार्टी ने 2 बार के सांसद रहे दरोगा प्रसाद सरोज पर भरोसा जताया है. उधर, बहुजन समाज पार्टी ने मौजूदा सांसद संगीता आजाद का टिकट काट दिया है और उनकी जगह असिस्टेंट प्रोफेसर इंदु चौधरी को मैदान में उतारा है.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: भदोही लोकसभा सीट

कालीन नगरी के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश का भदोही जिला राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम स्थान रखता है.

2019 के लोकसभा चुनाव में भदोही सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी.  भदोही को संत रविदास नगर के नाम से भी जाना जाता है. कालीन निर्माण और हस्तकला के मामले में यह शहर दुनियाभर में मशहूर है. भदोही जिले के पूरब में वाराणसी और पश्चिम में प्रयागराज जिला बसा हुआ है तो उत्तर में जौनपुर और दक्षिण में मिर्जापुर जिला आता है. भदोही जिले में 5 विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली तो एक सीट बीजेपी और एक सीट निषाद पार्टी के खाते में गई.

भदोही लोकसभा सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद रमेश चंद बिंद का टिकट काट दिया है. उनकी जगह विनोद कुमार बिंद को उम्मीदवार बनाया है. जबकि इंडिया गठबंधन की सहयोगी समाजवादी पार्टी ने इस सीट को TMC को दे दी है. टीएमसी ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के पोते ललितेशपति त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. जबकि बीएसपी ने हरिशंकर चौहान पर भरोसा जताया है.

2019 के संसदीय चुनाव में इस सीट पर बीजेपी की ओर से रमेश चंद्र बिंद मैदान में उतरे थे जबकि बसपा की ओर से रंगनाथ मिश्रा ने चुनौती पेश की. कांग्रेस ने रमाकांत यादव को मैदान में उतारा. बसपा के साथ चुनावी करार की वजह से सपा से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा.

इस चुनाव में रमेश चंद्र बिंद ने 510,029 वोट हासिल किए तो रंगनाथ मिश्रा को 4,66,414 वोट मिले. ऐसे में यहां पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा और रमेश चंद्र को महज 43,615 वोटों से ही जीत मिल सकी. इससे पहले 2014 के संसदीय चुनाव में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त को जीत मिली थी. वीरेंद्र सिंह मस्त ने 4,03,695 वोट हासिल किए और बसपा के राकेश धर त्रिपाठी को 2,45,554 वोट आए. वीरेंद्र सिंह ने यह मुकाबला 1,58,039 मतों के अंतर से जीत लिया.

वैसे भदोही सीट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है. 2009 में यह लोकसभा सीट अस्तित्व में आई. यहां पर पहली जीत बसपा के खाते में गई और गोरख नाथ पांडेय सांसद चुने गए. पहले यह सीट मिर्जापुर-भदोही लोकसभा सीट हुआ करती थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: श्रावस्ती लोकसभा सीट

श्रावस्ती को बौद्ध नगरी के नाम से दुनियाभर में विशेष रूप से पहचाना जाता है.  इस सीट पर बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साकेत मिश्र को उम्मीदवार बनाया है. जबकि इंडिया गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर रामशिरोमणि वर्मा को उम्मीदवार बनाया है.

साल 2019 लोकसभा चुनाव में रामशिरोमणि शर्मा बीएसपी के टिकट पर सांसद चुने गए थे. बीएसपी ने इस बार इस सीट पर मुस्लिम कैंडिडेट पर भरोसा जताया है और मुइनुद्दीन अहमद खान उर्फ हाजी दद्दन खान को मैदान में उतारा है.

श्रावस्ती जिले की श्रावस्ती लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला था. इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी को कांटेदार मुकाबले में हरा दिया. बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे राम शिरोमणि वर्मा ने बीजेपी के दद्दन मिश्रा को हराया था. जबकि 2014 में यह सीट बीजेपी के पास थी.

महात्मा बुद्ध के समय में श्रावस्ती कोशल देश की राजधानी थी. श्रावस्ती नगर तब 6 महानगरों (चंपा, साकेत, राजगृह, श्रावस्ती, कौशांबी और वाराणसी) में भी शामिल था. श्रावस्ती जिले का गठन 2 बार किया गया. 22 मई 1997 को इसे जिला घोषित किया गया, लेकिन 13 जनवरी 2004 में राज्य सरकार ने जिले का अस्तित्व ही खत्म कर दिया. बाद में जून 2004 में श्रावस्ती को फिर से नया जिला बना दिया गया. बौद्ध ग्रंथ बताते हैं कि अवत्थ श्रावस्ती नाम के एक ऋषि के आधार पर इस नगर का नाम श्रावस्त पड़ा. पुराणों में श्रावस्ती शहर को भगवान राम के पुत्र लव की राजधानी बताया गया है.

Sixth phase of Loksabha Election 2024:अंबेडकरनगर लोकसभा सीट

उत्तर प्रदेश की अंबेडकर नगर लोकसभा सीट पर पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को झटका देते हुए जीत हासिल की थी. लेकिन पिछले 5 सालों में यहां की सियासत में लगातार बदलाव आता चला गया और आम चुनाव की तारीखों के ऐलान से कुछ समय पहले ही बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले रितेश पांडेय ने पार्टी छोड़ दी. फिर रितेश बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने रितेश पांडेय को ही उम्मीदवार बनाया है.

इस सीट पर बीएसपी ने कमर हयात को उम्मीदवार बनाया है. कमर हयात जलालपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं. उधर, समाजवादी पार्टी ने लालजी वर्मा पर भरोसा जताया है.

अंबेडकर नगर को 29 सितंबर 1995 को अयोध्या (तब फैजाबाद) से अलग कर नया जिला बनाया गया था.  अंबेडकर नगर संसदीय सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. बड़ी बात यह है कि प्रदेश में सत्तारुढ़ बीजेपी को 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से एक भी सीट नहीं मिली थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: संतकबीरनगर लोकसभा सीट

संत कबीर नगर को महान संत कबीर दास की धरती के रूप में जाना जाता है. पहले यह क्षेत्र बस्ती जिले का हिस्सा था, लेकिन बाद में 5 सितंबर 1997 को संत कबीर नगर के रूप नए जिले की स्थापना कर दी गई. यह क्षेत्र कबीर दास की गतिविधियों का क्षेत्र था. इसलिए, इस जिले का नाम ‘संत कबीर नगर’ रखा गया.

बीजेपी ने इस सीट से प्रवीण निषाद को दूसरी बार मैदान में उतारा है. प्रवीण निषाद यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद के बेटे हैं. जबकि समाजवादी पार्टी ने इस सीट से पूर्व राज्यमंत्री लक्ष्मी उर्फ पप्पू निषाद पर भरोसा जताया है. बीएसपी ने नदीम अशरफ पर दांव लगाया है और मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनाने की कोशिश की है.

साल 2019 में हुए संसदीय चुनाव में संत कबीर नगर लोकसभा सीट से बीजेपी को जीत मिली थी. बीजेपी ने यहां से प्रवीण कुमार निषाद को खड़ा किया था.

संत कबीर नगर लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें 3 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस संसदीय सीट को 3 जिलों के क्षेत्रों को शामिल कर बनाया गया. अंबेडकर नगर, संत कबीर नगर और गोरखपुर की विधानसभा सीटों को इस नई संसदीय सीट में शामिल किया गया. संत कबीर नगर लोकसभा सीट का अस्तित्व ज्यादा पुराना नहीं है और 2008 के परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई थी. इस सीट से बसपा के भीष्म शंकर तिवारी ने जीत हासिल करते हुए पहले सांसद बने थे.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: आजमगढ़ लोकसभा सीट

मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई आजमगढ़ सीट पर 2022 में हुए उपचुनाव में सपा को मुंह की खानी पड़ी और इस सीट पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया था. इस सीट से बीजेपी ने उपचुनाव में दिनेश लाल निरहुआ को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि समाजवादी पार्टी ने धर्मेंद्र यादव को चुनावी मैदान में उतारा था. इस सीट पर दिनेश लाल निरहुआ ने जीत हासिल की थी. इस बार भी बीजेपी ने दिनेश लाल निरहुआ और सपा ने धर्मेंद्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. इसलिए ये सीट दोनों पार्टियों के लिए खास की बात हो गई हैं.

बीएसपी ने इस सीट पर एक बार फिर मुस्लिम कार्ड खेला है और मशहोद सबीहा अंसारी को उम्मीदवार बनाया है.

सपा का गढ़ माने जाने वाली आजमगढ़ संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ और मेहनगर शामिल है और यहां से बीजेपी के खाते में एक भी विधानसभा सीट नहीं है.

कौशल साम्राज्य का हिस्सा रहे आजमगढ़ को प्रशासनिक रूप से ब्रिटिश हुकूमत ने 1832 में जनपद बनाया. बेहद समृद्ध व गौरवशाली इतिहास वाले इस जनपद की इस संसदीय क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी शानदार रहा है. 1994 में आजमगढ़ जिला मंडल मुख्यालय घोषित किया गया.

काशी और अवध के मध्य की भूमि कहे जाने वाले आजमगढ़ की धरती ऋषि-मुनियों साहित्यकारों की धरती के नाम से जाना जाता है. जहां के प्रमुख स्थान देवल दत्ता, दुर्वासा आश्रम और चंद्रमा ऋषि आश्रम है. यह स्थान राहुल सांस्कृत्यायन, हरिऔध, लक्ष्मीनारायण मिश्र, कैफी आजमी, अल्लामा शिब्ली के लिए भी जानी जाती है.

2024 के इस चुनाव में सपा की इज्‍जत दांव पर है तो उधर बीजेपी की साख भी दांव पर है.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: बस्ती लोकसभा सीट

बस्ती लोकसभा सीट से बीजेपी ने हरीश द्विवेदी पर लगातार तीसरी पर दांव लगाया है. हरीश द्विवेदी पिछले 10 साल से सांसद हैं. उधर, समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री रामप्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा है. जबकि बहुजन समाज पार्टी ने लवकुश पटेल को उम्मीदवार बनाया है.

हिंदी के प्रकांड विद्वान, आलोचक, निबंधकार, अनुवादक, कथाकार और कवि आचार्य रामचंद्र शुक्ल की धरती के नाम से पहचाने जाने वाली बस्ती ने कई महान हस्तियों से समाज को नवाजा है. इस जिले की अपनी ऐतिहासिक पहचान है.

प्राचीन काल में बस्ती को वैशिश्थी के नाम से जाना जाता था. वैशिश्ठी नाम वसिष्ठ ऋषि के नाम से बना है, जिनका ऋषि आश्रम यहीं पर था. बस्ती का वर्तमान नाम 16वीं सदी में राजा कल्हण ने रखा था. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1801 में बस्ती तहसील मुख्यालय बन गया था और 1865 में इसे गोरखपुर कमिश्नरी में नए जिले के मुख्यालय के रूप में चुना गया. बस्ती जिला पूर्व में संत कबीर नगर, पश्चिम में गोंडा, दक्षिण में फैजाबाद और अंबेडकर नगर, उत्तर में सिद्धार्थ नगर जिला से घिरा हुआ है.

बस्ती लोकसभा सीट में 5 विधानसभा सीट (हरैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर और महादेवा) है और सभी सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है. हरैया विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कब्जा है. 2017 के चुनाव बीजेपी के अजय कुमार सिंह ने समाजवादी पार्टी के राजकिशोर सिॆंह को 30,106 मतों के अंतर से हराया था. वहीं कप्तानगंज से बीजेपी के चंद्र प्रकाश ने बहुजन समाज पार्टी के राम प्रसाद चौधरी को 6,827 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की थी.

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Sixth phase of Loksabha Election 2024: मछलीशहर लोकसभा सीट

इस सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद बीपी सरोज को उम्मीदवार बनाया है. बीपी सरोज के पास जीत की हैट्रिक बनाने का मौका है. सरोज पिछले 10 साल से सांसद हैं. साल 2019 आम चुनाव में सरोज को सिर्फ 181 वोटों से जीत मिली थी. समाजवादी पार्टी ने 3 बार सांसद रहे तूफानी सरोज की 26 साल की बेटी प्रिया सरोज पर भरोसा जताया है. बीएसपी ने पूर्व आईएएस कृपाशंकर सरोज को मैदान में उतारा है.

पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में शामिल मछलीशहर को तहसील का दर्जा प्राप्त है. पश्चिम में प्रतापगढ़, रायबरेली और लखनऊ को मछलीशहर से जोड़ता है जबकि मछलीशहर पूर्वी तरफ से जौनपुर और वाराणसी से जुड़ा हुआ है.

मछलीशहर रिजर्व लोकसभा सीट है जिसके तहत पांच विधानसभा क्षेत्र मछलीशहर, मरियाहू, जाफराबाद, केराकत और पिंडरा आते हैं. जिसमें 2 सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है. संसदीय क्षेत्र के साथ-साथ मछलीशहर विधानसभा क्षेत्र भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यहां से समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: सुल्तानपुर लोकसभा सीट

इस सीट से बीजेपी ने पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसद मेनका गांधी को मैदान में उतारा है. इंडिया गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद पर दांव खेला है. जबकि बहुजन समाज पार्टी ने उदराज वर्मा को उम्मीदवार बनाया है . बीएसपी उम्मीदवार स्थानीय उम्मीदवार हैं. जबकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार बाहरी हैं.इस सीट की पिछले दिनों काफी चर्चा रही.

इसकी एक वजह यह है कि भाजपा ने पीलीभीत सांसद वरुण गांधी का टिकट तो काट दिया जबकि उनकी मां मेनका गांधी सुल्तानपुर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार बीजेपी की उम्मीदवार हैं.

सुल्तानपुर लोकसभा से 2014 से 2019 के बीच मेनका गांधी के बेटे और बीजेपी नेता वरुण गांधी सांसद रहे हैं. 2019 में भाजपा ने मां और बेटे की सीटें आपस में बदल दीं और मेनका गांधी को सुल्तानपुर से चुनाव मैदान में उतारा यानी इस लिहाज़ से देखें तो पिछले दस सालों से इस सीट पर बीजेपी का कब्ज़ा है.

वैसे दिलचस्प ये है कि सुल्तानपुर लोकसभा सीट का अपना इतिहास रहा है. इस सीट पर किसी भी दल का कोई प्रत्याशी दोबारा चुनाव नहीं जीत सका है.

उधर छठे चरण से ठीक पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुल्तानपुर के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू को सपा में शामिल करवाया है. सोनू 2019 में मेनका के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं.पिछले चुनाव में बीएसपी की टिकट पर सोनू ने मेनका गांधी को कड़ी टक्कर दी थी. इस चुनाव में मेनका 14,526 वोटों से चुनाव जीतने में कामयाब रहीं थीं.

सोनू के सपा में शामिल होने से जातीय समीकरण अखिलेश के पक्ष में जाता दिख रहा है. क्योंकि सपा ने यहां से निषाद समुदाय के उम्मीदवार को टिकट दिया है.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: फूलपुर लोकसभा सीट

उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद केसरी देवी पटेल का टिकट काट दिया है और उनकी जगह विधायक प्रवीण पटेल पर भरोसा जताया है. समाजवादी पार्टी ने अमरनाथ मौर्य पर दांव खेला है. अमरनाथ मौर्य बीएसपी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. जबकि बीएसपी ने जगन्नाथ पाल को को उम्मीदवार बनाया है. यूपी में कांग्रेस के साथ सपा का गठबंधन होने से कांग्रेस ने यहां से अपना उम्‍मीदवार नहीं उतारा है.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के तहत फूलपुर लोकसभा सीट आती है, जहां पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कब्जा है. फूलपुर लोकसभा सीट को उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार किया जाता है. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी इस सीट से कई बार सांसद चुने गए थे. एक अन्य पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह भी यहां से चुने गए थे. गैंगस्टर अतीक अहमद भी इसी फूलपुर सीट से सांसद बने थे.

प्रयागराज जिले में आने वाली फूलपुर संसदीय सीट पर विधानभा सीटें आती हैं, जिसमें प्रयागराज पश्चिम, प्रयागराज उत्तर, फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर  सीट है. 2 साल पहले 2022 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में फूलपुर की 5 विधानसभा सीटों में से 4 पर बीजेपी को जीत मिली थी जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी को मिली थी.

फूलपुर लोकसभा सीट से देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू 3 बार सांसद चुने गए थे और निधन तक वह इस सीट से ही सांसद बने रहे. यह सीट एक समय में ‘नेहरू सीट’ के नाम से जानी जाती थी. 1964 में नेहरू के निधन के बाद यहां कराए गए उपचुनाव में उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित को जीत मिली थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: प्रतापगढ़ लोकसभा सीट

इस सीट से एनडीए की तरफ से बीजेपी ने मौजूदा सांसद संगम लाल गुप्ता पर भरोसा जताया है. जबकि इंडिया गठबंधन की तरफ से एसपी सिंह पटेल को मैदान में उतारा है. उधर, बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने वकील प्रथमेश मिश्रा पर दांव लगाया है. प्रथमेश मिश्रा के पिता शिव प्रकाश मिश्र कौशांबी बीजेपी प्रभारी हैं.

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं,  जिनमें रामपुर खास, विश्वनाथ गंज, प्रतापगढ़, पट्टी और रानीगंज विधानसभा सीटें शामिल है.  आंवला के उत्पादन में प्रतापगढ़ सूबे ही नहीं बल्कि देश भर में मशहूर है. यहां के लोगों का कृषि मुख्य व्यवसाय है. बेल्हा प्रतापगढ़ के नाम से जाना जाता था क्योंकि यहां सई नदी के किनारे मां बेल्हा देवी का मंदिर है.

लखनऊ और इलाहाबाद के बीचों बीच बसी ये सीट एक दौर में कांग्रेस का गढ़ थी.

आजादी के बाद से ही प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर 2014 तक करीब 15 बार लोकसभा सभा चुनाव हुए हैं. इनमें से 9 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है. जबकि एक बार सपा और एक ही बार बीजेपी जीत सकी है. इसके अलावा अपना दल, जनसंघ और जनता दल ने भी एक-एक बार जीत हासिल कर चुकी

2019 का जनादेश

2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगम लाल गुप्ता ने जीत हासिल की, उन्हें 4,36,291 वोट मिले थे. वहीं बीएसपी के अशोक कुमार त्रिपाठी 3,18,539 वोटों केसाथ दूसरे नंबर पर रहे और कांग्रेस की राजकुमारी रत्ना सिंह 77,096 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रही थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: जौनपुर लोकसभा सीट

जौनपुर लोकसभा सीट पर एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबला है. एनडीए की तरफ से बीजेपी ने पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह को उम्मीदवार बनाया है. जबकि समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है. बाबू सिंह ने जन अधिकार पार्टी बनाई थी.

इस सीट पर बीएसपी ने बड़ा खेल किया है. बीएसपी ने पहले बाहुबली धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन बाद में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया और उनकी जगह श्याम सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है. श्याम सिंह जौनपुर से मौजूदा सांसद हैं.

एतिहासिक रूप से गोमती नदी के किनारे बसा जौनपुर शहर अपने चमेली के तेल, तंबाकू की पत्तियों, इमरती और मूली के लिए प्रसिद्ध है. जौनपुर जिला वाराणसी मंडल के उत्‍तरी-पश्‍चि‍मी भाग में स्‍थि‍त है. जौनपुर जिले में 2 संसदीय क्षेत्र और कुल 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. जौनपुर के अलावा मछलीशहर एक और संसदीय क्षेत्र है. जौनपुर संसदीय क्षेत्र में 5 विधानसभा क्षेत्र (बादलपुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हानी और मुंगरा बादशाहपुर) आते हैं

2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के धनंजय सिंह ने सपा के पारसनाथ को हराया था. इस सीट से कांग्रेस ने जीत की शुरुआत की थी, लेकिन 1984 के बाद उसे यहां से एक बार भी जीत नहीं मिली है. 1962 में जनसंघ के ब्रह्मजीत भी विजयी रहे हैं. बीजेपी ने 1989 में राजा यघुवेंद्र दत्ता के रूप में यहां से पहली बार जीत हासिल की थी.

हालांकि 1991 में जनता दल ने बीजेपी से यह सीट छीन ली थी. 1996 में बीजेपी ने फिर से इस सीट पर कब्जा जमाया. 1996 से लेकर यहां की लड़ाई द्वीपक्षीय रही है और 4 चुनावों में एक बार बीजेपी तो एक बार सपा ने यह सीट जीता. 2009 में यह सिलसिला बसपा की जीत के बाद टूट गया. 2014 में बीजेपी ने यह सीट फिर से अपने नाम की. 1957 से लेकर 2014 तक 15 बार यहां लोकसभा चुनाव हो चुके हैं.

जौनपुर उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहरों में शामिल है. इतिहासकारों के अनुसार गुप्त काल के दौरान यहां पर बौद्ध धर्म का प्रभाव रहा और चन्‍द्रगुप्‍त वि‍क्रमादि‍त्‍य के काल में यह शहर मनइच तक जुड़ा रहा. मुस्लिम आक्रमणकारियों के आक्रमण से पहले यहां भार, कोइरी गुज्जर, प्रतिहार और गहरवारों का आधिपत्य बना रहा. इस शहर की महत्ता सल्तनत काल में तुगलक शासनकाल में काफी बढ़ गई थी. शहर की स्थापना 14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई सुल्तान मुहम्मद की याद में की थी. सुल्तान मुहम्मद का असली नाम जौना खां था. उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम जौनपुर रखा गया.

2019 का जनादेश

2019 लोकसभा चुनाव में बसपा ने भीजेपी को मात देते हुए उनके हाथों से यह सीट छीन ली. बसपा के श्याम सिंह यादव ने 5,21,128 वोटों से जीत हासिल की, जबकि बीजेपी प्रत्याशी कृष्णा प्रताप सिंह 4,40,192 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. सफा ऐर आम आदमी पार्टी को पीछे छोड़ते हुए कांग्रेस के देव व्रत मिश्र 27,185 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थें. जौनपुर लोकसभा सीट पर 56 फीसदी वो‍टिंग हुई थी.

Sixth phase of Loksabha Election 2024: इलाहाबाद लोकसभा सीट

इस सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद रीता बहुगुणा जोशी का टिकट काट दिया है. उनकी जगह पार्टी ने नीरज त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. नीरज त्रिपाठी पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी के बेटे हैं. जबकि इंडिया गठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने इस सीट से उज्ज्वल रमण सिंह को उम्मीदवार बनाया है. उज्ज्वल रमण सिंह मशहूर समाजवादी लीडर रेवती रमण सिंह के बेटे हैं. उधर, बीएसपी ने रमेश पटेल पर दांव लगाया है.

उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटों में इलाहाबाद सीट का नाम भी आता है. लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह, मुरली मनोहर जोशी, जनेश्वर मिश्रा जैसे राजनीतिक दिग्गजों के साथ-साथ अमिताभ बच्चन यहां से सांसद रह चुके हैं. ऐसे में इस सीट पर देश भर की निगाहें रहती हैं.

इलाहाबाद लोकसभा सीट पर 2019 तक 16 बार लोकसभा चुनाव और 3 बार उपचुनाव हुए हैं. 1952 से लेकर 1971 तक कांग्रेस का कब्जा रहा है. 1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में  स्वतंत्रता सेनानी श्रीप्रकाश कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और सांसद चुने गए. इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री 1957 में इस सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे और लगातार दो बार जीत हासिल की. इसके बाद 1967 में हरिकृष्णा शास्त्री और 1971 में हेमवती नंदन बहुगुणा सांसद चुने गए थे.

कांग्रेस के इस विजयरथ को जनेश्वर मिश्रा ने रोका था. 1973 में भारतीय क्रांति दल से जनेश्वर मिश्रा उतरे और सांसद बने. इसके बाद 1984 में अमिताभ बच्चन कांग्रेस के टिकट पर यहां से सांसद बने. 1988 के उपचुनाव में वीपी सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. इलाहाबाद सीट पर बीजेपी का पहली बार खाता 1996 में खुला था. बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी 1996 से 1999 तक लगातार तीन बार जीत हासिल की. 2004 और 2009 में समाजवादी पार्टी के रेवती रमण सिंह जीते थे.

2014 में यह सीट बीजेपी एक बार जीतने में कामयाब रही. बीजेपी के श्याम चरण गुप्ता ने सपा के रेवती रमण सिंह को शिकस्त दी थी. लेकिन इस बार के चुनाव में श्यामा चरण गुप्ता बीजेपी का दामन छोड़कर सपा में शामिल हो गए हैं.

2019 का जनादेश

2019 लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद से बीजेपी की रीता बहुगुणा जोशी ने सपा के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह पटेल हराया था. राता बहुगुणा जोशी को 4,94,454 वोट मिले थे और राजेंद्र सिंह को 3,10,179 वोट मिले. कांग्रेस के प्रत्याशी योगेश शुक्ला को महज 31,953 वोट मिले.

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